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गुरु पूर्णिमा के बारेमें संपूर्ण जानकारी – Guru Purnima

Guru Purnima

गुरु हर किसी के जीवन का मुख्य आधार होता है। माता-पिता के बाद मनुष्य के जीवन में गुरुओं का विशिष्ट स्थान होता है, जो कि मनुष्य को इस संसार रुपी ज्ञान का बोध करवाता है और उसे अपने कर्तव्यपथ पर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करता है एवं सफलता के पथ पर आगे बढ़ता है।

वहीं प्राचीन काल से ऋषि, मुनियों, साधू-संतों का काफी महत्व रहा है। हिन्दू धर्म में गुरुओं को भगवान से भी ऊंचा दर्जा दिया गया है, क्योंकि गुरु न सिर्फ इंसान को इस संसार रुपी भव सागर से पार करवाने में उसकी मद्द करता है।

बल्कि मनुष्य के जीवन से अंधकार मिटाकर ज्ञान का दीप जलाता है और उसका आत्मसात करने में मद्द करता है। इसके साथ ही गुरु मनुष्य को ऐसे कर्म करने की प्रेरणा देता है, जिन्हें कर मनुष्य मृत्यु के बाद भी अमर हो जाता है।

वहीं गुरु के महत्व को समझने और अपने गुरुओं के प्रति आदर-सम्मान का भाव प्रकट करने के लिए हर साल हिन्दू कैलेंडर के आषाण महीने की पूर्णिमा को ‘गुरु पूर्णिमा’ का पर्व मनाया जाता है।

इस पर्व को हिन्दू धर्म के लोगों द्धारा बेहद हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। वहीं साल 2019 में गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व 16 जुलाई को मनाया जाएगा। 2019 में गुरु पूर्णिमा के मौके पर करीब 149 सालों बाद चंद्र ग्रहण का पड़ेगा।

“गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥”

अर्थात् गुरु ही ब्रह्मा हैं, जो अपने शिष्यों को नया जन्म देता है, गुरु ही विष्णु हैं जो अपने शिष्यों की रक्षा करता है, गुरु ही शंकर है; गुरु ही साक्षात परमब्रह्म हैं; क्योंकि वह अपने शिष्य के सभी बुराईयों और दोषों का संहार करता है। ऐसे गुरु को मैं नमन करता हूँ।

गुरु पूर्णिमा के बारेमें संपूर्ण जानकारी – Guru Purnima Information in Hindi

Guru Purnima

गुरु पूर्णिमा कब मनाई जाती है ? – Guru Purnima Kab Hai

कई महापुराणों, वेदों शास्त्रों एवं ग्रंथों की रचना करने वाले महर्षि वेदव्यास जी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व मनाया जाता है

महार्षि वेद व्यास जी को गुरु-शिष्य परंपरा का प्रथम गुरु माना गया है। हिन्दू कैलेंडर के आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को ‘गुरुपूर्णिमा’ का पर्व पूरी श्रृद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है।

इस पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा, आषाणी पूनम, गुरु पूनम आदि नामों से भी जाना जाता है। साल 2019 में गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व 16 जुलाई को मनाया जाएगा। इस मौके पर लोग अपने गुरुओं के प्रति आदर सम्मान के साथ कृतज्ञता प्रकट करते हैं और उनका आर्शीवाद लेते हैं।

गुरु पूर्णिमा पर जाने गुरु का अर्थ – Meaning of Guru Purnima

संस्कृत का गुरु शब्द दो अक्षरों से मिलकर बना है। ‘गु’ एवं ‘रु’ वहीं शास्त्रों में ‘गु’ अक्षर का अर्थ अन्धकार से है और ‘रु’ का अर्थ निरोधक और अंधकार मिटाने वाले से लिया गया है।

अर्थात, गुरु हमारे जीवन में सभी अंधकारों को मिटाकर हमें प्रकाश की तरफ आगे बढ़ाता है और हमारा सही मार्गदर्शन कर हमें सफलता के पथ पर अग्रसर करता है।

इसलिए शास्त्रों में भी गुरुओं कों एक विशिष्ट स्थान दिया गया है। वहीं गुरु पूर्णिमा के दिन अपने गुरुओं का ध्यान कर उनसे आशीर्वाद लिया जाता है और उनके प्रति आदर भाव व्यक्त किया जाता है।

गुरु पूर्णिमा का महत्व – Importance of Guru Purnima

गुरु को भगवान से भी बढ़कर दर्जा दिया गया है। वहीं हिन्दी साहित्य के कई महान कवियों ने भी गुरु की महिमा को अपने लेख,दोहों आदि के माध्यम से बताया है। वहीं महान कवि कबीर दास जी ने इस दोहे के माध्यम से कहा है कि –

“गुरु गोविन्द दोनों खड़े, काके लागूं पाँय।
बलिहारी गुरु आपनो, गोविंद दियो बताय॥”

गुरु और शिष्य के महत्व को समझने और अपने गुरुओं के प्रति श्रद्धाभाव एवं कृतज्ञता प्रकट करने के लिए गुरु पूर्णिमा का पर्व आदर्श पर्व है। गुरुओं को समर्पित इस पर्व का विशेष महत्व है।

गुरु पूर्णिमा के इस शुभ दिन सिर्फ गुरु ही नहीं, बल्कि जिससे भी आपको अपनी जिंदगी में कुछ सीखने को मिला हो और जो भी आपसे बड़ा है, अर्थात माता-पिता, भाई-बहन आदि को भी गुरु के तुल्य समझकर उनका सम्मान करना चाहिए एवं उनका आर्शीर्वाद लेना चाहिए, क्योंकि गुरु के आशीर्वाद से ही जीवन सफल बनता है।

श्रद्धाभाव से मनाए जाने वाले इस पावन पर्व गुरु पूर्णिमा के दिन गुरुओं की पूजा करने का भी विधान है। इस दिन गुरुओं को वस्त्र, फल, फूल आदि अर्पण कर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए। हिन्दू धर्म के साथ-साथ सिख धर्म में भी व्यास पूर्णिमा अथवा गुरु पूर्णिमा का खास महत्व है, दरअसल सिख इतिहास में उनके दस गुरुओं का बेहद महत्व रहा है।

गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व हर शिष्य के लिए बेहद शुभ और कल्याणकारी माना गया है। गुरु के प्रति आदरभाव प्रकट करने वाले इस आदर्श पर्व के दिन गंगा या फिर किसी अन्य पवित्र नदी में स्नान करना काफी शुभ माना गया है।

वहीं इस दिन लोग अपने गुरुओं की पूजा करने के साथ-साथ अपने गुरु के लिए उपवास भी रखते हैं।

वहीं प्राचीनकाल में जब शिष्य, गुरुकुलों में रहकर अपने गुरु से शिक्षा ग्रहण करते थे, तो गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व के दिन ही अपने गुरु के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए श्रद्धाभाव से गुरु को दक्षिणा देकर उनका पूजन करते थे।

इसके बाद ही उन्हें वेद, शास्त्र, धर्म की शिक्षा दी जाती थी। गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व गुरु से मंत्र प्राप्त करने का सबसे अच्छा और श्रेष्ठ दिन होता है। वहीं इस दिन मोक्ष का मार्ग दिखाने वाले गुरु की सेवा करने का भी विशेष महत्व है। इसलिए इस पर्व को श्रद्धापूर्वक मनाया जाना चाहिए।

गुरु पूर्णिमा पर गुरु दक्षिणा का महत्व – Importance of Guru Dakshina

गुरुओं को समर्पित इस पवित्र पर्व को पूरे देश में धूमधाम के साथ मनाया जाता है। वहीं गुरु-शिष्य के रिश्ते को तो प्राचीन काल से ही महत्व दिया जा रहा है।

अनादिकाल में जब शिष्य गुरुकुल में अपने गुरु के पास रहकर निशुल्क शिक्षा ग्रहण करते थे, तो इस दिन शिष्य अपने गुरुओं के प्रति उन्हें सही कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने और संसार रुपी ज्ञान का बोध करवाने के लिए अपनी कृतज्ञता प्रकट करते थे और अपने गुरु का पूजन कर उन्हें गुरु दक्षिणा देते थे।

इसके साथ ही आपको बता दें कि गुरुदक्षिणा उस समय दी जाती है या फिर कोई भी गुरु उस समय गुरु दक्षिणा लेता है, जब शिष्य को ज्ञान का बोध हो जाता है या फिर शिष्य भी अपने ज्ञान को किसी अन्य को बांटने के लायक अथवा गुरु बनने के लायक हो जाता है।

वहीं जब शिष्य अपने गुरु से पूरा ज्ञान ग्रहण कर लेता है तभी गुरु दक्षिणा सार्थक होती है। गुरुदक्षिणा, गुरु के प्रति सम्मान और समर्पण का भाव है। अर्थात, गुरु के प्रति सही दक्षिणा यही होती कि जब कोई भी शिष्य उसके द्धारा सिखाए गए ज्ञान को पूरी तरह अर्जित कर लेता है और अन्य को देने के योग्य बन जाता है।

गुरुद्रोणाचार्य ने भी अपने शिष्य एकलव्य से उसके अंगूठे के रुप में मांगी थी गुरु दक्षिणा – Guru Dronacharya and Eklavya

गुरु दक्षिणा को लेकर गुरु द्रोणाचार्य और एकलव्य से जुड़ी एक घटना काफी प्रचलित है। इसके मुताबिक एक बार गुरु द्रोणाचार्य ने अपने शिष्य एकलव्य को धनुष विद्या सिखाने के लिए उनसे अपने दाएं हाथ के अंगूठे के रुप में गुरु दक्षिणा देने के लिए कहा था, तब एकलव्य ने अपने गुरु का सम्मान रखते हुए अपना अंगूठा, गुरु दक्षिणा के रुप में अपने गुरु द्रोणाचार्य के चरणों में समर्पित कर दिया था।

वहीं इसके बाद एकलव्य की प्रसिद्धि एक आदर्श शिष्य के रुप में चारों तरफ फैल गई और वह इतिहास में वे एक युग पुरुष के रुप में मशहूर हो गए थे।

जाहिर है कि एक गुरु अपना पूरा जीवन अपने शिष्य को योग्य और सफल बनाने के लिए समर्पित कर देता है, वहीं दूसरी तरफ शिष्य का परम कर्तव्य है कि वह गुरु दक्षिणा देकर अपने गुरु का सम्मान करे।

वहीं इस गुरु दक्षिणा का आशय किसी संपत्ति औऱ धन-दौलत से नहीं होता है, बल्कि यह गुरु पर निर्भर करता है कि, वह अपने शिष्य से किस तरह की गुरु दक्षिणा की मांग करता है।

आज भी स्कूल, कॉलेजों में आषाण मास की पूर्णिमा ‘गुरु पूर्णिमा’ के दिन विद्यार्थी, इस दिन अपने गुरुओं के प्रति सम्मान भाव प्रकट करते हैं एवं गुरु दक्षिणा के रुप में कुछ भेंट देते हैं।

आषाण मास की पूर्णिमा को ही क्यों मनाई जाती है गुरु पूर्णिमा – Why Guru Purnima is Celebrated

गुरुओं को समर्पित इस पर्व को हिन्दी कैलेंडर के आषाण महीने की पूर्णिमा के दिन इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन संस्कृत के प्रकंड विद्धान एवं महाभारत, वेदों और पुराणों की रचना करने वाले कृष्णद्धैपायन व्यास जी का जन्म हुआ था।

आपको बता दें कि वेदव्यास जी ने समस्त 18 पुराणों की रचयिता की थी एवं चारों वेदों की रचना कर उन्हें अलग-अलग किया था, वहीं इसी वजह से उनका नाम वेदव्यास पड़ गया था।

महर्षि वेदव्यास को भगवान विष्णु का अवतार भी माना गया है। इसके साथ ही वेदव्यास जी को समस्त मानव जाति का गुरु अर्थात आदि गुरु माना गया है।

गुरु पूर्णिमा के शुभ दिन कई लोग व्यास जी के तस्वीर का पूजन करते हैं, साथ ही उनके द्धारा रचित ग्रंथों का पाठ भी पढ़ते हैं। इसके अलावा गुरुओं को समर्पित गुरु पूर्णिमा के पर्व के दिन बहुत से मठों और आश्रमों में लोग ब्रह्रालीन संतों की मूर्ति या समाधि की भी पूजन करते हैं और अपने सफल भविष्य की कामना करते हैं।

इसके अलावा हिन्दी कैलेंडर के आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा बनाने के पीछे कई विद्धान यह भी तर्क देते हैं कि गुरु, आषाढ़ मास की पूर्णिमा के चंद्रमा की तरह होता है जो हर तरफ ज्ञान की ज्योति जलाकर प्रकाश भरने का काम करता है, और शिष्य, आषाढ़ मास के बादलों की तरह काले यानि की अंधकार में रहते हैं।

और इस दिन अंधेरे बादल भी प्रकाशमान हो जाते हैं इसलिए इस दिन को गुरु पूर्णिमा के रुप में मनाया जाता है। फिलहाल गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व को मनाने के पीछे कई धार्मिक और पौराणिक कथाएं भी जुड़ी हुईं हैं।

गुरु पूर्णिमा से जुड़ी महान कथा – Story of Guru Purnima

हमारा भारत देश पुरातनकाल से ही ऋषि-मुनियों और साधु-संतो की तपोभूमि रहा है। वहीं हमारी भारतीय संस्कृति में गुरु को विशिष्ट स्थान दिया गया है और गुरु पूजन के लिए गुरु पूर्णिमा का दिन निर्धारित किया गया है।

वहीं आस्था और श्रद्धा के साथ मनाए जाने वाले इस पावन पर्व को मनाने के पीछे भी कई महान कथाएं जुड़ी हुई हैं।

महर्षि वेदव्यास से जुड़ी है गुरु पूर्णिमा की महान कथा:

महर्षि वेदव्यास जो संस्कृत के महान और प्रकंड विद्धान थे, उन्होंने श्रीमद भागवत गीता, समस्त 18 पुराणों की रचना की थी एवं 4 वेदों को अलग-अलग विभाजित किया था। इसलिए महर्षि वेदव्यास जी को समस्त दुनिया का गुरु और आदि गुरु माना गया है।

इसके साथ ही उन्हें गुरु-शिष्य परंपरा का पहला गुरु भी माना गया है। वेदव्यास जी इस बात को बखूबी जानते थे कि जिस किसी से भी कुछ सीखने को मिलता है, वह गुरु समान होता है, फिर चाहे सिखाने वाला कोई छोटा सा जीव ही क्यों न हो।

कैसे मनाई जाती है गुरु पूर्णिमा – How to Celebrate Guru Purnima

गुरुओं को समर्पित पर्व गुरु पूर्णिमा का हिन्दू धर्म में बहुत महत्व है। इस दिन लोग अपने गुरुओं का ध्यान कर उनके प्रति अपना आदर भाव प्रकट करते हैं।

इस दिन शिष्य सही, गलत की परख बताने वाले अपने गुरुओं की पूजा करते हैं साथ ही उनका आर्शीवाद लेते हैं एवं अपने गुरुओं को वस्त्र आदि भेंट करते हैं एवं उन्हें गुरु दक्षिणा देते हैं।

इसके साथ ही गुरु पूर्णिमा के खास दिन ब्राह्मणों को दान देने एवं गरीबों और जरूरमंदों को खाना खिलाने का भी बेहद महत्व है। इस दिन गंगा अथवा किसी अन्य नदी में स्नान करने के बाद लोग अपने गुरु की पूजा करते हैं।

वहीं जो लोग किसी को अपना गुरु नहीं मानते हैं, वे गुरु-शिष्य परंपरा की शुरुआत करने वाले एवं वेदों और पुराणों की रचना करने वाले महर्षि वेदव्यास जी की पूजा-अर्चना करते हैं। गुरु पूर्णिमा के दिन लोग व्रत भी रखते हैं।

ग्ररु पूर्णिमा के दिन उपवास रखने के कुछ नियम – Guru Purnima Puja Vidhi

  • गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व के मौके पर सुबह उठकर पूरे घर की साफ-सफाई करनी चहिए।
  • गुरु पूर्णिमा के दिन गंगा या फिर अन्य किसी पवित्र में स्नान करने शुभ माना गया है, ऐसा करने से सभी दोष मिटते हैं। साफ-सुथरे कपड़े पहनकर पहनना चाहिए।
  • अपने घर में पवित्र स्थान पर एक पटिए पर सफेद वस्त्र फैलाकर उस पर पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक 12-12 रेखाएं बनाकर व्यासपीठ बनानी चाहिए।
  • गुरु पूर्णिमा के शुभ दिन ‘गुरुपरंपरासिद्धयर्थं व्यासपूजां करिष्ये’ मंत्र का जाप कर संकल्प लेना चाहिए।
  • इसके बाद अपने घर में चार दिशाओं में अक्षत(चावल) छोड़ना चाहिए।
  • गुरुओं को समर्पित इस गुरु पूर्णिमा के दिन अपने गुरु का ध्यान करना चाहिए और उनकी पूजा – अर्चना करने से कल्याणकारी आशीर्वाद मिलता है।
  • अपने मन में शुकदेव जी, गोविंद स्वामी जी, व्यास जी, ब्रह्मजी आदि के के मंत्र से पूजा-हवन आदि करने से अपने गुरुओं का ध्यान करना चाहिए।
  • गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर वेदों, शास्त्रों और धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन मनन करना भी शुभ माना गया है।
  • गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर अपने गुरुओं के पूजा-अर्चना करने का विधान है।
  • गुरुओं के आदर-सत्कार के इस पर्व के दिन गरीबों, असहाय, जररूतमंदों को दान देने से पुण्य प्राप्त होता है और मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। इस पावन पर पर ब्रहा्णों को भी दान देना शुभ माना जाता है।

गुरु पूर्णिमा पर शुभकामनाएं संदेश, व्हाट्सऐप मैसेज, कोट्स – Guru Purnima Wishes

गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर आप इन संदेशों को सोशल मीडिया साइट्स फेसबुक, व्हाट्सऐप आदि पर शेयर कर अपने गुरु के प्रति अपनी भावनाओं को उजागर कर सकते हैं साथ ही गुरु पूर्णिमा की बधाई दे सकते हैं –

  • “गुरु पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर, मेरा गुरु के चरणों में प्रणाम
    मेरे गुरु जी सदा कृपा राखियो, तेरे पर ही अर्पण मेरे प्राण
    गुरु पूर्णिमा की हार्दिक बधाईयां।।”
  • “गुरु की महिमा न्यारी है, जिसने अज्ञानता को दूर करके।
    ज्ञान की ज्योति जलाई है, गुरु की महिमा न्यारी है।
    गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं।।”
  • “गुरु होता है सबसे महान, जो देता है सबको ज्ञान,
    आओ सब मिलकर करें इस गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरु को प्रणाम।
    गुरु पूर्णिमा की हार्दिक बधाईयां।”
  • “माता-पिता ने जन्म दिया लेकिन, गुरुवर ने जीने की कला सिखाई है।
    ज्ञान, चरित्र और संस्कार की, हमने आपसे ही शिक्षा पाई है, गुरु की महिमा सबसे न्यारी है।।
    गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं।।”
  • “गुरु और गोविंद दोनों में गुरु ही सबसे भारी है,
    और गुरु की महिमा न्यारी है।।
    गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं।।”
  • “मां-बाप की मूरत है गुर, कलयुग में भगवान की सूरत है गुरु।।
    गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं।।”
  • “गुरु की महिमा है अगम, गाकर तरता शिष्य।
    गुरु कल का अनुमान कर,गढ़ता आज का भविष्य।।
    गुरु पूर्णिमा की हार्दिक बधाईयां।।”
  • “गुरु है गंगा परम ज्ञान की, जो करे पाप का नाश,
    ब्रह्रा-विष्णु और महेश, सब काटे भाव का पाश।।
    गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं।।”

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