दुनिया का सबसे ऊँचा इन्सान | World’s Tallest Man “Robert Wadlow”

आज़ दोस्तों हम बात करेंगे दुनिया के सबसे ऊँचे कद वाले आदमी की, जिनका कद अभी तक के इतिहास में सबसे ऊँचा है। आज हम एक ऐसे इन्सान के बारेमें जानेंगे जिसके बारेमें जानकर आप हैरान हो जाओंगे-

World's Tallest Man Robert Wadlow

दुनिया का सबसे ऊँचा इन्सान – World’s Tallest Man “Robert Wadlow”

जन्म – 22 फरवरी 1918
मृत्यु – 15 जुलाई 1940
मृत्यु की वजह – इन्फेक्शन ( संक्रमण )
हाईट – 2.72 मी.
जूतों का नम्बर – 37
वजन – 220 कि. ग्रा.

रोबर्ट पेर्शिंग वाडलो को साधारणतः एल्टन जायंट और इलिनोइस का जायंट के नाम से भी जाना जाता है। अमेरिका में रहने वाले रोबर्ट दुनिया के सबसे ऊँचे आदमी है, लेकिन इससे संबंधित कोई सबूत नही है।

वाडलो ऊंचाई में 8 फीट 11.1 इंच लंबे है जिनका वजन 22 साल की उम्र में उनकी मृत्यु के समय 220 कोलोग्राम था। हाइपरप्लासिया की वजह से युवावस्था में ही उनके शरीर के आकार में असामान्य बढ़ोतरी होने लगी, जिसके चलते उनके शारीरिक हार्मोंस भी तेजी से बढ़ने लगे। यहाँ तक की मृत्यु के समय में भी उनके शरीर के विकास में किसी प्रकार की कोई रूकावट नही आयी।

वाडलो का जन्म एडी जॉनसन और हेरोल्ड वाडलो की संतान के रूप में 22 फरवरी 1918 को इलेनॉइस के एल्टन में हुआ और अपने माता-पिता की पांच संतानों में वे सबसे बड़े थे। रॉबर्ट के माता पिता का कद बिलकुल सामान्य था। जन्म के समय दुसरे नवजात बच्चों की तरह उनका वजन और बाकि हरकतें भी सामान्य ही थी। लेकिन धीरे धीरे उनका कद और वजन असामान्य रूप से बढ़ने लगा, अपने पहले बर्थडे पर वाडलो की लम्बाई 3 फीट 3.5 इंच थी और वजन 45 पौण्ड के करीब।

8 साल की उम्र से ही वे ऊंचाई में अपने पिता से बड़े थे और माध्यमिक स्कूल में अपनी ऊंचाई की वजह से उनके लिए विशेष डेस्क की व्यवस्था की गयी थी। 13 वर्ष की उम्र में ही वाडलो की लम्बाई करीब 7 फीट 4 इंच थी, जो दुसरे सामान्य बच्चों से कही ज्यादा थी। समय के साथ-साथ 1936 में एल्टन हाई स्कूल से ही वे ग्रेजुएट हुए और उस समय उनकी ऊंचाई 8 फीट 4 इंच थी। ग्रेजुएट होने के बाद लॉ की पढाई करने के लिए वे शर्टलेफ्फ़ कॉलेज में दाखिल हुए।

अंतिम वर्ष और मृत्यु:

वाडलो की हाईट ही उनकी कमजोरी बनने लगी : चलने के लिए कई बार वाडलो को लेग ब्रेसिज़ की जरुरत पड़ती थी। इस तरह की परेशानियाँ होने के बावजूद उन्होंने कभी व्हीलचेयर का उपयोग नही किया। रॉबर्ट की असाधारण ऊंचाई के पीछे उसके pituitary gland का बढ़ना मुख्य कारण था। धीरे-धीरे रॉबर्ट के पैर और एड़ियों में कमजोरी आने लगी। सेंसेशन की कमी से भी वह पीड़ित था। जैसे जैसे वह बढ़ने लगा उसे चलने के लिए लेग ब्रेसेस और सहारे की जरुरत पड़ने लगी।

1936 में रिंग्लिंग ब्रदर्स सर्कस के साथ यूनाइटेड स्टेट की यात्रा पूरी करने के बाद वाडलो सेलेब्रिटी बन चुके थे। इसके बाद 1938 में उन्होंने इंटरनेशनल शू कंपनी (INTERCO) के साथ मिलकर प्रचारक दौरे भी किए। इस कंपनी ने रॉबर्ट के लिए खास जूते बनाए थे, जिसकी साइज थी-37AA, यूनाइटेड स्टेट की बहुत सी जगहों पर आज भी हमें उनके द्वारा किये गये प्रचार का उदाहरण देखने मिलता है। जिसमे लुडिंगटन और मेनीस्टी, मिशिगन का स्नाइडर शू स्टोर और एतिहासिक और कलात्मक एल्टन म्यूजियम भी शामिल है।

वाडलो मेसोनिक स्पॉन्सर्ड संस्था डीमोले के भी सदस्य थे, जो युवा व्यक्तिमत्व वाले लोगो की एक संस्था थी। साथ ही वे एक संगतराश भी थे। 1939 में उन्होंने एल्टन, इलेनॉइस के फ्रेंक्लिन लॉज #25 से अनुरोध भी किया और उसी साल नवम्बर के अंत में इलेनॉइस के ग्रैंड लॉज के अधिकार क्षेत्र में उन्होंने मास्टर ऑफ़ मेसन की डिग्री हासिल कर ली।

अपने जीवन के अंतिम वर्षो में उनका शरीर शारीरिक रूप से काफी शक्तिशाली था।

अपनी मृत्यु से एक साल पहले वाडलो ने दुनिया के सबसे लंबे व्यक्ति जॉन रोगन को पछाड़ा था। मात्र 22 वर्ष की आयु में रॉबर्ट ने दुनिया को अलविदा कह दिया। 27 जून 1940 (उनकी मृत्यु से 18 दिन पहले) को डॉक्टरो के अनुसार उनकी ऊंचाई 8 फीट 11.1 इंच थी। मिसौरी के सेंट लुइस की वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के डॉ. सी.एम्. चार्ल्स और सायरिल मैक ने उनकी ऊंचाई नापी थी।

4 जुलाई 1940 को मेनीस्टी नेशनल फ़ॉरेस्ट फेस्टिवल में प्रोफेशनल उपस्थिति के दौरान उनके टखने को चोट लग गयी, जिसकी वजह से उनके शरीर में संक्रमण फैलता गया। डॉक्टर ने उनका ईलाज इमरजेंसी सर्जरी के रूप में किया लेकिन स्व-प्रतिरक्षित विकार की वजह से उनकी परिस्थिति बिगडती चली जा रही थी और संक्रमण के 11 दिन बाद 15 जुलाई 1940 को 22 साल की उम्र में नींद में ही उनकी मृत्यु हो गयी। उनका ताबूत तक़रीबन 10 फीट 9 इंच लम्बा और 32 इंच चौड़ा और 30 इंच गहरा था, जिसका वजन तक़रीबन 450 किलो था। इलेनॉइस के मैडिसन काउंटी के अप्पर एल्टन के ऑकवुड सिमेट्री में उन्हें दफनाया गया।

विरासत:

एल्टन के कॉलेज एवेन्यू में वाडलो का विशालकाय स्टेच्यु बना हुआ है, जो एल्टन म्यूजियम की विपरीत दिशा में ही बना हुआ है। उन्हें सम्मान देने के उद्देश्य से 1986 में इसका निर्माण किया है। उनका एक और स्टेच्यु हमें नियाग्रा फॉल्स और गेटलीनबर्ग गिनीज म्यूजियम में भी दिखाई देता है। आर्टिस्ट जेम्स बटलर ने उनपर एक मॉडल का निर्माण भी किया है, जिसे रेप्लिका कस्तूरी में प्रदर्शित किया गया है।

मिशिगन की फार्मिंगटन हिल्स के मर्विंस मर्वेलोउस मैकेनिकल म्यूजियम में भी हमें वाडलो का स्टेच्यु देखने मिलता है। उनके जीवन पर आधारित बहुत सी रोचक कथाओ को भी फिल्मो में वर्णित किया गया है।

सामान्य इंसान के जैसे रॉबर्ट के भी कुछ शौक थे उन्हें फोटोग्राफी करना और गिटार बजाना बहुत पसंद था। लेकिन अपने जरूरत से ज्यादा ऊँचे कद के करण उन्हें ये सब करने में परेशानी होती थी। रॉबर्ट स्वाभाव से काफी शांत एवं सुलझे हुए व्यक्ति थे उनके अच्छे व्यवहार के कारण ही उन्हें लोग प्यार से “जेंटल जायंट” भी कहते थे।

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