“कलिंग युद्ध” एक ऐसा भयानक युद्ध जिसके के बाद सम्राट अशोक ने अहिंसा का मार्ग अपनाया…………. 

Kalinga War

इतिहास की किताबों में आपने कई युद्धों के बारे में पड़ा होगा। जिनमें से ज्यादातर युद्धों में हमें केवल यही पढ़ने को मिलता है कि एक देश या एक राज्य ने दूसरे राज्य को हराया और उसे अपने आधीन कर लिया उसे अपने राज्य में शामिल कर लिया। लेकिन क्या आप जानते है इतिहास का एक युद्ध ऐसा है जिसने न केवल एक राजा बल्कि हजारों लोगों की जिंदगी बदली दी। और लोगों को युद्ध से हटकर शांति के रास्ते पर चलने की एक नई सोच दी।

ये हम जानते है कि हर युद्ध में एक की हार होती है तो एक की जीत। लेकिन हार जीत के बीच दो प्रतिवंद्धियों के हजारों लोग मारे जाते है। कई लाख लोगों की जिंदगी बदल जाती है। लेकिन कलिंग का युद्ध इतिहास का एक ऐसा युद्ध माना जाता है जिसमें लाखों सैनिकों की जान गई।

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“कलिंग युद्ध” एक ऐसा भयानक युद्ध जिसके के बाद सम्राट अशोक ने अहिंसा का मार्ग अपनाया – Kalinga War

लेकिन कलिंग युद्ध ने सम्राट अशोक की न केवल जिंदगी बदली बल्कि उन्होनें इस युद्ध के बाद हिंसा का रास्ता पूरी तरह छोड़ दिया और बौद्ध धर्म की शरण में चले गए। लेकिन कलिंग युद्ध में ऐसा क्या हुआ था जिसने अशोक का हद्य परिवर्तन कर दिया क्योंकि ऐसा नहीं था कि कलिंग युद्ध से पहले अशोक ने नरंसहार नहीं देखा था। चलिए आपको बताते है वो एक कारण जिसने सम्राट अशोक की जिंदगी बदल दी।

कलिंग युद्ध का इतिहास और जानकारी – Kalinga Yudh

चक्रवर्ती सम्राट अशोक मौर्य सम्राज्य के राजा थे अशोक राजा बिंदुसार के दूसरे पुत्र और चंद्रगुप्त मौर्य के पोते थे। और अपने पिता और दादा की ही तरह सम्राट अशोक में वीरता के गुण कूट कूट कर भरी थी। लेकिन राजा बिंदुसार के कई पुत्र थे और अशोक से बड़ा पुत्र था सुषम। जिस वजह से राजगद्दी के लिए अशोक को अपने ही भाइयों के साथ गृहयुद्ध करना पड़ा था।

जिसके बाद अशोक को सत्ता मिली थी। अशोक इतने शुरवीर योद्ध और राजा थे कि उस समय उनका सम्राज्य ईरान और बर्मा तक फैला था। जहां – जहां तक अशोक ने अपने राज्य का विस्तार किया वहां पर अशोक स्तंभों की स्थापना की।

जिनमें से बहुत से स्तंभ मुगल काल के आक्रमण के दौरान तोड़ दिए गए। लेकिन कलिंग युद्ध के बाद सम्राट अशोक की सोच में परिवर्तन आया। दरअसल कलिंग युद्ध अशोक के राज्याभिषेक के बाद 8वें साल में लड़ा गया था। यानी की आज से 261 ई.पू कलिंग का युद्ध हुआ था। इस युद्ध में दोनों ही राज्यों ने अपनी पूरी ताकत डाल दी थी।

माना जाता है कि कलिंग युद्ध में कलिंग की तरफ से डेढ़ लाख यौद्धाओं ने युद्ध में भाग लिया था वहीं मौर्य समाज ने अपने एक लाख यौद्धा युद्ध में उतारे थे। हालांकि अंत में विजय चक्रवर्ती सम्राट अशोक की हुई। लेकिन अशोक जब राजा पद्मनाभन को हराने के बाद जब कलिंग के किले की ओर आगे बढ़े तो कलिंग की राजकुमारी और सभी महिलाएं तलवार लेकर खड़ी हो गई। महिलाओं को देख अशोक ने उनसे हटने का आग्रह किया।

लेकिन कलिंग की महिलाएं अशोक से युद्ध करना चाहती थी। लेकिन सम्राट अशोक कभी भी महिलाओं से युद्ध नहीं करते थे। पर उन महिलाओं का कहना था कि मौर्यों से युद्ध में उनके पति, भाई, बेटे सभी शहीद हो गए इसलिए वो भी युद्ध करना चाहती है जिस वजह से उन्होनें अपनी तलवार फेंक दी। अशोक को उस पल एहससा हुआ कि उनके इस युद्ध के कारण कितने परिवार उजड़ गए कितने बच्चे अनाथ हो गए।

कलिंग युद्ध अशोक सम्राट के जीवन का आखिरी युद्ध था इसके बाद अशोक ने अहिंसा का मार्ग अपनाया और बौद्ध धर्म अपना लिया। सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म का प्रचार बर्मा, श्रीलंका, अफगानिस्तान, ईरान तक किया। इसके अलावा लोगों की भलाई के लिए जगह – जगह सड़कों का निर्माण करवाया, पीने के पानी के लिए तालाब की व्यवस्था की।

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