सिक्किम का इतिहास और जानकारी | Sikkim History Information

Sikkim

सिक्किम जैसा काफी छोटा राज्य भारत के उत्तरपूर्वी दिशा में स्थित है। इसके उत्तर और पूर्व में चीन, पूर्व में भूटान, पश्चिम में नेपाल और इसके दक्षिण में पश्चिम बंगाल राज्य है। गंगटोक इस राज्य की राजधानी है। यहापर हमारे देश का सबसे बड़ा और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा पर्वत कन्चंजुन्गा भी पाया जाता है। राज्य का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा कन्चंजुन्गा राष्ट्रीय उद्यान से घिरा हुआ है।
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सिक्किम का इतिहास और जानकारी – Sikkim History Information

17 वी शताब्दी में नामग्याल वंश ने सिल्क रस्ते पर सिक्किम राज्य की स्थापना की थी। उस समय इस राज्य पर चोग्याल नामक राजा का शासन था। सन 1890 मे इस राज्य पर अंग्रेजो ने कब्ज़ा कर लिया था। लेकिन सन 1947 के बाद यह राज्य भारत का स्वतन्त्र राज्य में गिनना शुरू हो गया। हिमालय में जितने भी राज्य है उनमेसे सबसे ज्यादा साक्षरता का दर और प्रति व्यक्ति आय का दर सबसे ज्यादा यही है।

सन 1975 में भारतीय सेना ने इस राज्य में चल रहे राजतन्त्र को ख़तम कर दिया। सन 1975 के जनमत के आधार पर इसे भारत में शामिल कर लिया गया और तभी से यह भारत का 22 वा राज्य बन गया।

इस राज्य की केवल एक या दो विशेषताए नहीं बल्की कई सारी खास बाते इस राज्य से जुडी है। उसमेसे सबसे पहली और खास बात यह है की पुरे भारत में सबसे ज्यादा इलायची का उत्पादन इसी राज्य में होता है। यानि हमारे यहा जो इलायची आती है वो ज्यादातर सिक्किम से ही आती है। और गौटेमाला के बाद पूरी दुनिया में मसालों के उत्पाद में सिक्किम का दूसरा नंबर लगता है।

इस छोटेसे राज्य की दूसरी एक खास बात यह है की पुरे देश में जैविक खेती को पूरी तरह से अपनाने वाला पहला राज्य है। यानि की यहापर जो खेती होती है वो पूरी तरह से सुरक्षित होती है और इससे पर्यावरण को कोई भी हानी नहीं होती। पर्यावरण की सुरक्षा के लिए इस राज्य ने एक और बात अच्छी की है, वो यह है की यहापर कोई भी प्लास्टिक की बोतल इस्तेमाल नहीं करता। पुरे राज्य में कही भी प्लास्टिक की एक बोतल भी देखने को नहीं मिलती।

सिक्किम के जिले – Districts of Sikkim

सिक्किम के चार जिले है: पश्चिम, पूर्व, उत्तर और दक्षिण।

सिक्किम में धर्मं – Religions in Sikkim

यहाँ पर हिन्दू और वज्रयान बौद्ध धर्मं के लोग बड़ी मात्रा में देखने को मिलते है। जिसमे लगभग 57।8 प्रतिशत लोग हिन्दू धर्म का पालन करते है। और 27।3 प्रतिशत लोग वज्रयान बौद्ध धर्मं का पालन करते है और यह राज्य का दूसरा सबसे बड़ा धर्मं है।

यहापर जितने भी लोग क्रिस्चियन धर्मं के है वो लेपचा वंश के उत्तराधिकारी है और उन्हें अंग्रेजो ने जबरदस्ती धर्म परिवर्तन करने लिए मजबूर किया था। वो कुल जनसँख्या के 10 प्रतिशत है। 2014 की तारीख तक इवैंजेलिकल प्रेसबायतेरियान चर्च सिक्किम का सबसे बड़ा चर्च है। यहापर कुछ बिहार के मुस्लीम धर्मं और जैन धर्मं के लोग रहते है और वो कुल जनसँख्या के केवल 1 प्रतिशत ही है।

सिक्किम राज्य की भाषा – Language of Sikkim

इस राज्य में कई सारे संप्रदाय के लोग और अलग अलग भाषा बोलने वाले लोग है। सिक्किम की 11 अधिकारिक भाषाए है उनमे नेपाली, मगर, सिक्किमी, तमांग, लिम्बू, लेपचा, नेवारी, राइ, गुरुग, सुन्वार, और इंग्लिश भी शामिल है। सभी स्कूलों में इंग्लिश भाषा पढाई जाती है और सभी सरकारी कागजात में भी इंग्लिश भाषा का इस्तेमाल किया जाता है।

सिक्किम की नदिया – Sikkim River

सिक्किम की सबसे बड़ी नदी तीस्ता है। यह नदी सिक्किम को दो हिस्सों में बाटती है। तीस्ता नदी को सिक्किम की गंगा कहा जाता है। सिक्किम के ज्यादातर लोग तीस्ता नदी पर ही निर्भर है। रिंगित नाम की नदी भी यहाँ की प्रमुख नदी मानी जाती है।

सिक्किम की संस्कृति – Culture of Sikkim

देश में सबसे कम जनसंख्या सिक्किम राज्य में ही है। यहापर नेपाली लोग (75%), लेपचा (20%) और भुतिया और लिम्बस धर्मं के लोग भी कम संख्या में पाए जाते है। इस राज्य में सबसे पहले आनेवाले लोग लेपचा ही थे। 13 वी शताब्दी में तिब्बत के खाम प्रदेश से आनेवाले भूटिया लोगो ने साथ में ही बौद्ध धर्मं के महायान पंथ को भी साथ में लाया था। सिक्किम में सबसे आखिरी में आनेवाले नेपाली लोग ही थे और वो 19 वी शताब्दी में आये थे। तीनो लोगो की संस्कृति को मिलाकर आज की सिक्किम की नयी संस्कृति हमें देखने को मिलती है।

नेपाली भी इस राज्य की भाषा है और ज्यादातर लोग इसी भाषा में बोलते है। एक शब्द जिसे सुखिम कहते हैजिसका अर्थ होता है की ‘सुखी परिवार, शांति की जगह’ और इस सुखिम शब्द से इस राज्य को सिक्किम नाम दिया गया है। हिन्दू धर्म का पालन करनेवाले लोग ज्यादा होने के बावजूद भी यहापर बौद्ध धर्म का प्रभाव भी काफी हद तक पाया जाता है।

यहाँ के शिल्पकला की बात की जाए तो इसमें सबसे महशूर चोकसी टेबल होते है और उन्हें तिब्बत की शैली में बनाया जाता है। यहापर मिलनेवाला ऊनि गलीचा काफी सुन्दर होता है। सोने और चांदी के जेवरात में नक्काशी किये हुए काफी महंगे खड़े मिलते है।

सिक्किम के त्यौहार – Festivals of Sikkim

सिक्किम के सभी लोग भगवान बौद्ध का जन्मदिन मनाते है। ऊन्हे जिस दिन ज्ञान की प्राप्ति होती उसे भी धूम धाम से मनाते है। भगवान बौद्ध का निर्वाण दिन भी यहापर मनाया जाता है। इसके अलावा भी बौद्ध धर्मं का नया साल और फसल उत्सव भी मनाया जाता है।

सिक्किम की कला – The art of Sikkim

मुखौटा नृत्य सिक्किम का सबसे प्रसिद्ध नृत्य है। इस नृत्य को त्यौहार के दौरान गोम्पा आंगन में किया जाता है। इस नृत्य में उनके पैरों की हालचाल काफी सुन्दर और देखनेलायक होती है। इस नृत्य के दौरान लाम लोग बहुत सुन्दर रंग वाले मुखौटे पहनेते है और पूरी तरह नृत्य के दौरान जेवरात से सजे हुए रहते है और उनके हातो में तलवार भी होती है और दूसरी तरफ़ ड्रम बजाये जाते है और तुरही बजायी जाती है और आजूबाजू में सभी मठवासी खड़े रहकर गाना गाते है।

सिक्किम देखने का सबसे अच्छा समय – Best time to see Sikkim

यहाँ का सामान्य तापमान करीब 28 डिग्री ही रहता है। आप यहापर मार्च से जून और सितम्बर से दिसंबर तक आ सकते है। अगर आप यहापर होने वाली बारिश से बचाना चाहते है तो बारिश में मौसम में यहापर ना आना ही समझदारी वाला काम है।

भारत के इस छोटेसे राज्य ने बाकी बड़े बड़े राज्य की तुलना में काफी विकास किया है और आगे भी विकास के मार्ग पर बड़ी तेजी से जा रहा है। इसी बात को ध्यान में रखकर हमारे देश के सभी राज्यों में सबसे तेज विकास करनेवाले राज्य में सिक्किम जैसे छोटेसे राज्य को भी शामिल किया गया है।

हर राज्य की कम से कम एक अधिकारिक भाषा होती है लेकिन सिक्किम जैसे छोटेसे राज्य की केवल एक अधिकारिक भाषा नहीं बल्की कुल 11 अधिकारिक भाषाए है। इतना छोटासा राज्य होने के बाद भी इस राज्य की 11 भाषाए हो सकती है इसपर कोई विश्वास ही नहीं कर सकता। लेकिन हमें यह माननी पड़ेगी क्यों की यही इस राज्य की सच्चाई है।

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