उत्तर प्रदेश का इतिहास और जानकारी | Uttar Pradesh History Information

Uttar Pradesh

देश में हर राज्य की अपनी खुद की एक पहचान होती है। कुछ राज्य बहुत ही बड़े है तो कुछ बहुत छोटे है। हर राज्य की अलग अलग विशेषता होती है। उसी तरह उत्तर प्रदेश – Uttar Pradesh की भी अपनी विशेषता है। यह राज्य बहुत ही बड़ा है और क्षेत्रफल की दृष्टि से देखे तो इस राज्य का देश में चौथा नंबर आता है।

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उत्तर प्रदेश का इतिहास और जानकारी – Uttar Pradesh History Information

यह एक पवित्र और महान राज्य है क्यों की इस राज्य की जमीन पर भगवान श्री राम का जन्म हुआ था। उनकी अयोध्या इसी उत्तर प्रदेश में है। भगवान श्री कृष्ण की मथुरा भी इसी राज्य में है। इसी पावन और पवित्र भूमि की जानकारी हम आपको देनेवाले है। इस राज्य की पूरी जानकारी, इसका गौरवशाली इतिहास, इसके खास त्यौहार इन सब बातो को जानकारी निचे दी गयी है।

उत्तर प्रदेश एक बहुत ही विशेष राज्य है और इस राज्य को इन्द्रधनुष की जमीन भी कहा जाता है। इस राज्य में सांस्कृतिक विविधता दिखाई देती है। भगवान श्री राम, भगवान श्री कृष्ण, गौतम बुद्ध, महावीर, सम्राट अशोक, हर्ष, अकबर बादशाह, महात्मा गांधी जैसे महान नायको ने इस जमीन कार्य किये थे।

समृद्ध और बड़े बड़े मैदान, घने जंगल, उपजाऊ मिटटी इस राज्य की विशेषता है। कई सारे पवित्र तीर्थस्थल, भव्य त्यौहार इस राज्य में मनाये जाते है। भारत की राजनीती, शिक्षा, कला एवं संस्कृति, उद्योग और कृषि में इस राज्य का अहम योगदान है।

गंगा और यमुना जैसी पवित्र नदिया भी इसी राज्य में बहती है। उत्तर प्रदेश के पूर्व में बिहार, दक्षिण में मध्य प्रदेश, पश्चिम में राजस्थान, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और हरयाणा और उत्तर में उत्तराँचल स्थित है। उत्तर प्रदेश के उत्तरी सीमा में नेपाल की सीमा भी लगती है।

उत्तर प्रदेश का क्षेत्रफल 2,36,286 वर्ग किमी है। क्षेत्रफल की दृष्टि से उत्तर प्रदेश का देश में चौथा स्थान है। इस राज्य की विशेषता यह भी है की इसका क्षेत्रफल फ्रांस से आधा है, पुर्तगाल से तीन गुना बड़ा है, आयरलैंड से चार गुना बड़ा है, स्विट्ज़रलैंड के सात गुना, बेल्जियम से दस गुना और इंग्लैंड से भी बड़ा है।

उत्तर प्रदेश का इतिहास – History of Uttar Pradesh

महान मौर्य सम्राट चन्द्रगुप्त (शासनकाल ईसापूर्व 321-297), सम्राट अशोक (ईसापूर्व तीसरी सदी), समुद्र गुप्त (चौथी सदी) और चन्द्रगुप्त 2 (शासनकाल 380 से 415) इन सभी राजा महाराजा ने उत्तर प्रदेश में ही शासन किया था। हर्ष जैसे महान और प्रसिद्ध शासक (शासनकाल 606-647) ने भी इस राज्य में एक समय में शासन किया था। राजा हर्ष अपनी राजधानी कान्यकुब्ज से पुरे उत्तर प्रदेश पर नियंत्रण करने का काम करते थे। उनका राज्य आज के बिहार, मध्य प्रदेश, पंजाब और राजस्थान में भी स्थित था।

ईसापूर्व छटी सदी के दौरान वैदिक धर्म पूरी तरह से ब्राह्मण लोगो का हो चूका था जिसकी वजह से ईसापूर्व दूसरी सदी तक जिसका रूप पूरी तरह से हिन्दू धर्म में परिवर्तित हो गया था। इसी समय के दौरान यानि ईसापूर्व छटी और चौथी सदी के दौरान गौतम बुद्ध ने भी वाराणसी के सारनाथ में पहली बार धर्मोपदेश किया था।

उन्होंने जिस बौध्द धर्म की स्थापना की थी वो केवल भारत तक ही सिमित नहीं रही बल्की चीन और जापान जैसे देशो में भी इस धर्मं के लोग बड़ी संख्या में है। बौद्ध ने जिस जगह पर परिनिर्वाण लिया था वह कुशीनगर भी उत्तर प्रदेश में स्थित है। यह जगह आज कसिया नाम से जानी जाती है।

शुरुवात में बौद्ध, ब्राह्मण और हिन्दू संस्कृति का विकास साथ में ही हो रहा था। ईसापूर्व तीसरी सदी में सम्राट अशोक के समय में मूर्ति और वास्तुकला का काफी विकास हुआ था। गुप्त वंश (चौथी से छटी सदी) शासन काल में हिन्दू कला और संस्कृति का काफी विकास हुआ था। लेकिन 647 के करीब हर्ष राजा की मृत्यु होने के बाद में बौद्ध धर्म का पतन होना शुरू हो गया था और उसके साथ ही दूसरी तरफ़ हिन्दू धर्म का विकास बड़ी तीव्रता से होने लगा था।

लेकिन 12 वी सदी में जब मुज़ल्दीन मुहम्मद इब्न सैम (मुहम्मद घुरी) ने उत्तर प्रदेश के गहड़वालों को हराया तो उसके बाद यहापर मुस्लिमो का शासन शुरू हो गया था। करीब 600 सालों तक उत्तर प्रदेश में केवल मुस्लीम वंश के लोगो का ही शासन रहा और उत्तर प्रदेश दिल्ली के नजदीक होने के कारण दिल्ली सलतनत में भी कुछ लोग उत्तर प्रदेश के ही थे।
सन 1526 में बाबर ने दिल्ली के सुलतान इब्राहीम लोधी को हराकर दिल्ली में मुस्लीम वंश के शासन की स्थापना की जिसके कारण दिल्ली और उत्तर प्रदेश में 200 सालों से अधिक समय तक मुगलों ने शासन किया।

जब अकबर बादशाह (शासनकाल 1556-1605) बन गया था उसके समय में मुग़ल का साम्राज्य काफी बड़ा हो चूका था और अकबर बादशाह ने आगरा के नजदीक में अपनी नयी राजधानी फतेहपुर सिकरी की स्थापना की थी।

अकबर के पोते शाहजहाँ ने पत्नी की याद में आगरा में दुनिया की सबसे खुबसूरत ईमारत ताज महल बनाया था। शाहजहाँ ने आगरा और दिल्ली में बहुत सारी इमारतों का निर्माण किया था।

18 वी सदी और 19 वी सदी के मध्य के 75 साल के समय में ईस्ट इंडिया कम्पनी ने उत्तर प्रदेश का पूरा हिस्सा कब्जे में कर लिया था। शुरुवात में लोग इस प्रान्त को आगरा प्रेसीडेंसी कहते थे। ईस्ट इंडिया कम्पनी ने सन 1856 मे औध को अपने कब्जे में कर लिया था और सन 1877 में उत्तर पश्चिमी प्रान्त का हिस्सा बना दिया था। सन 1950 में जिस तरह के उत्तर प्रदेश का निर्माण किया गया ठीक उसी तरह का उत्तर प्रदेश उस समय के अंग्रेजो ने बनाया था।

जब 1880 के दौरान भारतीय राष्ट्रवाद की शुरवात होने लगी थी तो उस वक्त स्वतंत्रता आन्दोलन में संयुक्त प्रान्त का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान था। मोतीलाल नेहरु, पंडित मदन मोहन मालवीय, मोतीलाल के बेटे जवाहरलाल नेहरु और पुरुषोत्तम दास टंडन जैसे राष्ट्रीय नेता इसी संयुक्त प्रान्त से थे।

महात्मा गांधी ने जो सन 1920-22 में असहकार आन्दोलन शुरू किया था जिसकी वजह से अंग्रेजो की हुकूमत को बहुत बड़ा नुकसान हुआ था लेकिन संयुक्त प्रान्त के चौरी चौरा गाव में एक जगह पर हिंसा हुई थी जिसकी वजह से महात्मा गांधी को इस आन्दोलन को बिच में ही रोकना पड़ा। मुस्लीम लीग भी संयुक्त प्रान्त में ही रहकर अपने काम किया करती थी।

अंग्रेजो के समय में संयुक्त प्रान्त में कैनाल, रेलवे और अन्य तरह के यातायात का विकास किया गया। अंग्रेजो ने शिक्षा पर ज्यादा जोर देते हुए नए कॉलेज और यूनिवर्सिटीज की स्थापना की।

सन 1947 में देश को आजादी मिलने के बाद में संयुक्त प्रान्त को भारत में शामिल कर लिया गया था। दो साल बाद तेहरी गढ़वाल राज्य (उत्तराखंड), रामपुर, वाराणसी, को संयुक्त प्रान्त का हिस्सा बना दिया गया था। सन 1950 में भारत का नया संविधान बनने के बाद संयुक्त प्रान्त का नाम बदलकर उत्तर प्रदेश कर दिया गया।

उत्तर प्रदेश का देश में आजादी से लेकर आज तक बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान रहा है। इसी राज्य ने जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी जैसे प्रधान मंत्री इस देश को दिए।

उत्तर प्रदेश की भाषा – Uttar Pradesh Language

इस राज्य को हिंदी भाषा का राज्य भी कहा जाता है। उत्तर प्रदेश अधिकारिक भाषा अधिनियम 1951 के तहत हिंदी भाषा को राज्य के सभी कामकाज में इस्तेमाल करने का कानून का प्रावधान किया गया था।

उत्तर प्रदेश के पर्यटन स्थल – Uttar Pradesh Tourism

देश में सबसे ज्यादा पर्यटन इसी राज्य में होता है क्यों की सभी राज्य के लोग इसी उत्तर प्रदेश में भेट देने के लिए जाते है।

यहापर कई तरह के त्यौहार मनाये जाते है, कई स्मारक, मंदिर, विहार है और साथ ही इस राज्य की संस्कृति भी बहुत समृद्ध है। गंगा नदी के किनारे पर अलाहाबाद में ‘माघ मेला’ त्यौहार बड़े आनंद से मनाया जाता है।

यह त्यौहार 12 साल में एक बार मनाया जाता है और इस त्यौहार को कुम्भ मेला भी कहा जाता है। इस त्यौहार के दौरान 1 करोड़ से भी ज्यादा हिन्दू तीर्थयात्री आते है।

सारनाथ और कुशीनगर जैसे महत्वपूर्ण शहर गोरखपुर और वाराणसी से काफी नजदीक है। गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति होने के बाद पहला प्रवचन उन्होंने सारनाथ में दिया था और उन्होंने कुशीनगर में समाधी ली थी। इसीलिए बुद्ध धर्म के लोगो के लिए दोनों शहरे काफी महत्वपूर्ण है।

सारनाथ में अशोक स्तंभ भी है और यह सम्राट अशोक का महत्वपूर्ण शहर भी था। वाराणसी से केवल 80 किमी की दुरी पर गाजीपुर शहर है और यह शहर इसके घाटी के लिए काफी प्रसिद्ध है साथ ही बंगाल के गवर्नर लार्ड कॉर्नवालिस की कब्र भी है। इस कब्र की देखभाल करने का काम भारतीय पुरातत्व विभाग संभालता है। ईटाह शहर का पटना पक्षी अभयारण्य भी इसी शहर में स्थित है।

उत्तर प्रदेश राज्य की राजधानी – Uttar Pradesh Capitals लखनऊ में भी कई सुन्दर स्मारक है। इस शहर में औध समय के दौरान अंग्रेजो के रहने के क्वार्टर के अवशेष देखने को मिलते है। ताज महल, आगरा का किला, और फतेहपुर सिकरी जैसे विश्व धरोहर की तीन जगह है। वाराणसी शहर यहाँ के घाट के लिए काफी प्रसिद्ध है।

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सन 1972 में पर्यटन निदेशालय की स्थापना की गयी थी और इस संस्था के डायरेक्टर जनरल के पद पर आईएएस स्थर का अधिकारी जिम्मेदारी संभालता है।

व्यावसायिक पर्यटन का कामकाज सँभालने के लिए सन 1974 में उत्तर प्रदेश पर्यटन विकास निगम की स्थापना की गयी थी।

इस राज्य की पृष्टभूमि बहुत ही गहरी और लम्बी है। लम्बे समय से यहापर कई तरह के लोग आये और चले गए। लेकिन जाते जाते उन्होंने अपनी संस्कृति, वास्तुकला इस राज्य को विरासत में दे दी।

इसीलए यहापर कई तरह के मंदिर, ऐतिहासिक स्मारक, प्राचीन विहार नजर आते है। अलग अलग समय में अलग अलग राजा महाराजा ने इस जमीन पर शासन किया था। प्राचीन समय में चंद्रगुत, अशोक सम्राट जैसे महान राजा ने इस राज्य में शासन किया था।

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दिल्ली के सुलतान ने भी कुछ समय तक इसी राज्य की जमीन पर राज्य किया था। मुग़ल और अंग्रेजो ने भी लम्बे समय तक यहापर हुकुमत की थी। इससे पता चलता है है सभी लोगो के शासन का प्रभाव यहापर देखने को मिलता है।

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